विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव

Class 8

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विद्युत धारा

किसी विद्युत परिपथ (Electric Circuit) में इलेक्ट्रॉनों के लगातार प्रवाह को विद्युत धारा कहते हैं।

यह एक अदिश राशि (Scalar Quantity) है। विद्युत धारा का SI मात्रक एम्पियर (Ampere) होता है।

विद्युत धारा को मापने के लिए अमीटर (Ammeter) नामक यंत्र का उपयोग किया जाता है।

विद्युत धारा और इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा

विद्युत धारा तथा इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा हमेशा एक-दूसरे के विपरीत होती है।

विद्युत धारा का प्रवाह धन आवेश (+) से ऋण आवेश (–) की ओर माना जाता है, जबकि इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह ऋण आवेश (–) से धन आवेश (+) की ओर होता है।

विद्युत धारा के प्रकार

1. प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current - AC) :-

ऐसी विद्युत धारा, जिसका मान तथा दिशा समय-समय पर बदलते रहते हैं, उसे प्रत्यावर्ती धारा कहते हैं।

इस धारा की आवृत्ति सामान्यतः 50 हर्ट्ज (Hz) होती है। हमारे घरों में बिजली के तारों द्वारा आने वाली विद्युत धारा प्रत्यावर्ती धारा ही होती है।

यह धारा मुख्य रूप से अल्टरनेटर (Alternator) तथा ऑसिलेटर (Oscillator) जैसे उपकरणों से प्राप्त की जाती है।

2. दिष्ट धारा (Direct Current - DC) :-

         ऐसी विद्युत धारा, जिसका मान तथा दिशा समय के साथ नहीं बदलते, उसे दिष्ट धारा कहते हैं।

●    इस विद्युत धारा की आवृत्ति 0 हर्ट्ज (Hz) होती है।

●    यह धारा हमें मोबाइल बैटरी, सेल, इन्वर्टर, तथा डी.सी. जनरेटर आदि से प्राप्त होती है।

चालक (Conductor) :-

ऐसे पदार्थ, जिनसे होकर विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित होती है, उन्हें विद्युत का चालक कहते हैं।

उदाहरण :- तांबा, एल्युमिनियम, लोहा आदि।

चालक पदार्थ / चालकों के प्रकार :-

विद्युत धारा के प्रवाह के आधार पर चालक पदार्थ मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं -

1.    सुचालक (Good Conductor)

2.    हीन चालक (Poor Conductor)

3.    कुचालक (Insulator)

1.    सुचालक (Good Conductor) :-

ऐसे पदार्थ, जिनसे होकर विद्युत धारा बहुत आसानी से प्रवाहित होती है, उन्हें सुचालक कहते हैं।

इन पदार्थों में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या अधिक होती है, जिसके कारण विद्युत धारा का प्रवाह सरलता से हो पाता है।

उदाहरण :- तांबा, चाँदी, एल्युमिनियम, लोहा आदि।

2.     हीन चालक (Poor Conductor) :-

ऐसे पदार्थ, जिनसे होकर विद्युत धारा बहुत कम मात्रा में प्रवाहित होती है, उन्हें हीन चालक कहते हैं।
इन पदार्थों में विद्युत धारा का प्रवाह कठिनाई से होता है।

उदाहरण :- गीली लकड़ी, साधारण पानी, मानव शरीर आदि।

3.     कुचालक (Insulator) :-

ऐसे पदार्थ, जिनसे होकर विद्युत धारा प्रवाहित नहीं होती, उन्हें कुचालक कहते हैं।
इन पदार्थों में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या बहुत कम होती है, इसलिए विद्युत धारा का प्रवाह नहीं हो पाता।

उदाहरण :- रबर, प्लास्टिक, काँच, सूखी लकड़ी आदि।

आधार हीन चालक कुचालक
विद्युत धारा का प्रवाह बहुत कम मात्रा में होता है बिल्कुल नहीं होता
प्रवाह की स्थिति कठिनाई से प्रवाहित होती है प्रवाहित नहीं होती
उदाहरण गीली लकड़ी, साधारण पानी रबर, प्लास्टिक, काँच

विद्युत धारा का रासायनिक प्रभाव :-

जब विद्युत धारा को किसी सुचालक तरल पदार्थ से प्रवाहित किया जाता है, तब उसमें रासायनिक परिवर्तन होने लगते हैं। इस प्रक्रिया में वह पदार्थ अपने आयनों (Ions) में विभाजित हो जाता है। विद्युत धारा के कारण होने वाले इस रासायनिक परिवर्तन को विद्युत धारा का रासायनिक प्रभाव कहते हैं।

इस प्रक्रिया को विद्युत अपघटन (Electrolysis) कहा जाता है।
जब विद्युत धारा किसी द्रव्य, जैसे पानी में मिले अम्ल, क्षार या लवण के विलयन में प्रवाहित की जाती है, तब उसके आयन अलग-अलग होकर विभाजित हो जाते हैं।

●    यह घटना विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव के कारण ही होती है।

●    जब विद्युत धारा को किसी सुचालक तरल पदार्थ से प्रवाहित किया जाता है, तब रासायनिक प्रक्रिया के कारण वह पदार्थ अपने आयनों (Ions) में विभाजित हो जाता है। इस प्रक्रिया को विद्युत धारा का रासायनिक प्रभाव कहते हैं।

विद्युत-अपघटन

विद्युतलेपन (Electroplating) :-

विद्युत धारा की सहायता से किसी वस्तु या पदार्थ की सतह पर वांछित धातु की पतली परत चढ़ाने की प्रक्रिया को विद्युतलेपन कहते हैं।

●    जब कॉपर सल्फेट के विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तब कॉपर सल्फेट वियोजित होकर कॉपर तथा सल्फेट              आयनों में विभाजित हो जाता है।

●    ताँबे के इलेक्ट्रोड से समान मात्रा में कॉपर विलयन में घुलता रहता है।

●    आभूषण बनाने वाली सस्ती धातुओं पर सोना एवं चाँदी की परत चढ़ाने के लिए विद्युतलेपन किया जाता है।

●    खाद्य पदार्थों के भंडारण हेतु उपयोग किए जाने वाले टिन के डिब्बों में लोहे के ऊपर टिन की परत चढ़ाई जाती है, ताकि लोहे में        जंग न लगे।

विद्युतलेपन

विद्युतलेपन के वास्तविक जीवन में उपयोग

●   आभूषणों पर सोना एवं चाँदी की परत चढ़ाने में।

●   लोहे की वस्तुओं पर जंग से बचाव के लिए टिन या क्रोमियम की परत चढ़ाने में।

●   साइकिल, कार तथा मशीनों के पुर्जों को चमकदार बनाने में।

●   खाद्य पदार्थों के डिब्बों पर टिन की परत चढ़ाने में।

●   विद्युत उपकरणों एवं इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की सुरक्षा के लिए धातु की परत चढ़ाने में।